पीएम मोदी का दोस्त श्रीलंका का बन गया प्रधानमंत्री तो बौखला उठा चीन. क्या अब पूरा होने जा रहा है मोदी का सात साल पुराना सपना. श्रीलंका कंगाल हो चुका है. एक एक रोटी के लिए यहां हिंसा हो रही है. लेकिन अब जिस रानिल विक्रमसिंघे को श्रीलंका का नया प्रधानमंत्री बनाया गया है इन्हें भारत का सच्चा दोस्त कहा जाता है. लोग कह रहे हैं श्रीलंका को भी एक मोदी मिल गया है. रानिल विक्रमसिंघे की पार्टी यूनाइटेड नेशनल पार्टी के पास सिर्फ 225 में सिर्फ एक सीट है. लेकिन एक साथ पूरा श्रीलंका बोल उठा रानिल विक्रमसिंघे को ही प्रधानमंत्री बनाओ. इस करिश्मा को देखकर दुनियाभर के देश हैरान हो गए हैं. लेकिन भारत के लिए ये बहुत अच्छी खबर है. सात साल पहले पीएम मोदी और रानिल विक्रमसिंघे ने दिल्ली में बैठकर एक सपना देखा था. ये सपना पूरा होता इससे पहले ही रानिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री की कुर्सी गवानी पड़ गई थी इसके बाद पीएम मोदी और रानिल विक्रमसिंघे का सपना अधूरा रह गया था. लेकिन ये वक्त फिर से लौट आया है.
2005 से 2015 तक महिंद्र राजपक्षे श्रीलंकाई के राष्ट्रपति थे. 2010 के बाद चीन श्रीलंका में पैर पसारने लगा था. तब भारत ये समझ चुका था कि चीन अपने जाल में श्रीलंका को फंसा रहा है. लेकिन महिंद्र राजपक्षे ने भारत को दुश्मन समझा और चीन के साथ दोस्ती बढ़ाता रहा. इसके बाद जब 2018 और 2020 में महिंद्र राजपक्षे प्रधानमंत्री बने तो पूरी तरह से चीन के इशारे पर नाचने लगे और श्रीलंका कंगाल हो गया. राजपक्षे को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और अब रानिल विक्रमसिंघे को पांचवी बार श्रीलंका का प्रधानमंत्री बनाया गया है. दुनिया जब श्रीलंका के बर्बाद होने का तमाशा देख रही है...भारत हर तरह से मदद पहुंचा रहा है. लेकिन अब चलिए वो कहानी बताते है जब 2015 में पीएम मोदी और श्रीलंका के प्रधानमंक्षी रानिल विक्रमसिघे ने दिल्ली में बैठकर सपना देखा था. अब अगर यह सपना पूरा होता है तो लाखों तमिल लोगों की जिंदगी बदल जाएगी.
2014 में जब प्रधानमंत्री मोदी पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने उसके करीब 6 हमने बाद 9 जनवरी 2015 को रानिल विक्रमसिंघे तीसरी बार प्रधानमंत्री श्रीलंका के बने थे. इसके बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना और मोदी से मिलने के लिए दिल्ली आ गए. मोदी और रानिल विक्रमसिंघे की यह पहली मुलाकात थी लेकिन इसके बाद ये दोस्ती गहरी हो गई. भारत और श्रीलंका के बीच सबसे बड़ा मुद्दा तमिल लोगों की सुरश्रा का होता है. भारतीय मछुवारों को आए दिन समुद्र से श्रीलंका की सेना पकड़ लेती है. ना जाने कितने बेगुनाह लोगों को अपनी जिंदगी श्रीलंका की जेलों में गुजरनी पड़ी. रानिल विक्रमसिंघे के भारत दौरे के दौरान भी श्रीलंका ने 16 भारतीय मछुआरों को रिहा किया था. और ये मुद्दा तब हर अखबर की हेडलाइन बनी थी. मछुवारों की कहानी ठीक वैसी है जैसे पंजाब के रास्ते गलती से लोग भारत की सीमा पार करते पाकिस्तान चले जाते और फिर जिंदगी पाकिस्तान की जेलों में गुजारनी पड़ती थी. पाकिस्तान की सीमा ये कांटे लगाकर रास्ता बंद कर दिया गया. लेकिन श्रीलंका और भारत के बीच समुद्र में कब भारत से मछुवारे गलती से श्रीलंका पहुंच जाते हैं पता नहीं चलता है.
2015 में पीएम मोदी और रानिल विक्रमसिंघे ने एक दूसरे से वादा किया था की मछुवारों की समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाएगा. इसके साथ ही ऐसी सुविधाएं भी दी जाएगी ताकि तामिल मछुवारे गहरे पानी में जाकर भी शिकार कर सके. लेकिन श्रीलंका में लगातार राजनीति तूफान चलता रहा और फिर रानिल विक्रमसिंघे को अपनी प्रधानमंत्री की कुर्सी गवानी पड़ गई. इसके बाद ये सपना खत्म हो गया था लेकिन अब एक बार फिर से 7 साल पुराना ये सपना पूरा हो सकता है. भारत जिस तरह से श्रीलंका की मदद कर रहा है कुछ दिन पहले ही रानिल विक्रमसिंघे ने भारत की खूब तारीफ की थी और कहा था की दुनिया भर से ज्यादा भारत हमें मदद पहुंचा रहा है. भारत जो कर रहा है श्रीलंका ये कर्ज जिंदगी भार नहीं भूलेगा. लेकिन भारत के इस दोस्त के प्रधानमंत्री बनने के बाद अब चीन परेशान है. रानिल विक्रमसिंघे पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी फिलहाल श्रीलंका को बचाने की है. इसके बाद भारत के साथ मिलकर कुछ बड़ा कर सकते हैं. रानिल विक्रमसिंघे को श्रीलंका का प्रधानमंत्री बनाकर क्या सही किया गया..या फिर यह गलत फैसला है...अपना जवाब आप कामेंट बाक्स में देकर बता सकते हैं.

